विमर्श : गोचर-खेजड़ी मुद्दे पर झुक गई भजन सरकार !

हेम शर्मा

बीकानेर में गोचर आन्दोलन और खेजड़ी कटाई के मुद्दे पर राजस्थान की भाजपा सरकार ने घुटने टेक दिए हैं ! साधु-संतों की अगुवाई में गोचर अधिग्रहण प्रस्ताव का लगातार विरोध हो रहा था। विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, सिध्दी कुमारी, जेठानंद व्यास, अंशुमान सिंह भाटी, ताराचंद सारस्वत, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई, भाजपा शहर देहात अध्यक्ष सुमन छाजेड़ और श्याम पंचारिया एक सुर कहने लगे हैं कि गोचर यथावत रहेगी, खेजड़ी कटाई रोकने के कड़े क़ानून बनेंगे। ऐसा अचानक क्यों ? अचानक मुख्यमंत्री जी की आंखें क्यों खुली हैं ? प्रशासन और तथाकथित सत्ताधारी लोगों की सांठ-गांठ ने प्रदेश की भाजपा सरकार के घुटने टिका दिए हैं। याद करो उस जिला कलक्टर के व्यवहार को, जिसने गोचर के मुद्दे पर आंदोलनकारियों की बात तक नहीं सुनी थी, उल्टे भाजपा के नेता को गोचर का कब्जा करने वाला बता दिया था। याद करो उन 36 हजार आपत्तियों को, जिसे बिल्कुल अनदेखा कर दिया गया था। याद करो, उन ज्ञापनों, धरना-प्रदर्शन को, जिनको इन्होंने जुकाम जितनी तवज्जो नहीं परोसी थी। लेकिन अब वही जनविरोध प्रदेश सरकार और संगठन की साख पर बन आया है।

27 जनवरी का साधु-संतों का धरना और 2 फरवरी का महापड़ाव सरकार का सिर दर्द बन सकता है, तो भाजपा सरकार के विधायक और भाजपा संगठन एक सुर में साथ बैठकर मुख्यमंत्री के हवाले से कह रहे हैं कि गोचर की किस्म नहीं बदली जाएगी और खेजड़ी कटाई पर कड़ा कानून बनेगा। इन बातों पर कौन भरोसा करेगा ? मुख्यमंत्री ने नागौर में खेजड़ी के मुद्दे पर आन्दोलनकारियों को आश्वासन देकर धरना उठवा दिया था। कुछ नहीं हुआ तो फिर धरना देना पड़ा।

आप गौर करें …। बीकानेर जिले की गोचर भूमि को बीडीए के मास्टर प्लान में शामिल करने के सरकार के इस निर्णय और अवैध रूप से खेजड़ी कटाई के मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस के नेता तथा गाय- गोचर, पर्यावरण से जुड़ी संस्थाएं और विश्नोई समाज सरकार की आलोचना कर रहे हैं। अब साधु संतों की ओर से जन जागृति से ये मुद्दे जन-जन की जुबान पर है। गोचर के मुद्दे पर तो केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, बीकानेर भाजपा विधायक विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, सिध्दी कुमारी, जेठानंद व्यास, अंशुमान सिंह भाटी, ताराचंद सारस्वत, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई, भाजपा शहर देहात अध्यक्ष सुमन छाजेड़ और श्याम पंचारिया सरकार का लिखित में देकर या मौखिक कहकर ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी और अन्य नेता भी जनता के साथ बोल चुके हैं। खेजड़ी की अवैध कटाई के मामले में भाजपा विधायक अंशुमान सिंह भाटी विधानसभा में सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस के चार पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी कल्ला, भंवर सिंह भाटी, गोविन्द राम मेघवाल, महेन्द्र गहलोत, शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत देहात अध्यक्ष बिशना राम सियाग, प्रदेश सचिव गजेन्द्र सिंह सांखला और अन्य पदाधिकारियों ने इस निर्णय के खिलाफ बीकानेर कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। कई साधु संतों ने सरकार को चेतावनी दी। तब भी मुख्यमंत्री ने एक बार ही नहीं कहा कि गोचर यथावत रहेगी। इस यथावत रखने की दिशा में सरकार ने पिछले छह माह से कुछ भी नहीं किया गया।

अब जब धरने और महापड़ाव कि तारीखें नजदीक आ रही हैं तो मुख्यमंत्री के हवाले से सभी विधायक और संगठन का स्वर अलापना संदेह पैदा करता है। संत समाज की तरफ से महामंडलेश्वर स्वामी सरजूदास जी महाराज का कहना है कि “गोचर मामले में राजस्थान सरकार लिखित में क्यों नहीं दे रही है ? विधायकों और पार्टी संगठन के लोगों से क्यों कहलाया जा रहा है ? हम आज से 27 जनवरी के धरने के लिए दुगुने जोश से काम करेंगे। इन कोरी बातों में आने वाले नहीं है।”

वहीं, खेजड़ी आन्दोलन से जुड़े मोखा राम धरणिया का कहना है कि “मुख्यमंत्री खुद ने आश्वासन दिए। मीटिंगें कीं लेकिन परिणाम क्या निकला? इतने विधायकों और संगठन के लोगों से बयान कि जरुरत ही नहीं है, जो जनता चाहती है वो कर दें। लिखित में आदेश जारी करें। मौक़े पर लागू कर दें, बस बात खत्म।”

इसी तरह डॉ. बी.डी. कल्ला का कहना है कि “जब इतने बयान दिए जा रहे हैं तो अराजीराज भूमि को गोचर किस्म में क्यों नहीं इंद्राज की जा रही है? सिर्फ बयानों से कोई विश्वास करने वाला नहीं है। हम धरने पर बैठेंगे। जरुरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।”

कुल मिलाकर इन दोनों ही मुद्दों पर शासन-प्रशासन का जो रवैया है, उसकी विश्वनीयता पर सवाल बना हुआ है। फिर भी विधायकों की ओर से आन्दोलनकारियों को सर्किट हाउस में बातचीत के लिए बुलाया है।

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