विमर्श : राजस्थानी भाषा पर मुकेश की कॉमेडी मान्यता का नया नाद

यूट्यू्ब चैनल- मुकेश की कॉमेडी चैनल में ‘जय-जय राजस्थान.. जय राजस्थानी’ में राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर प्रभावी प्रस्तुति है। इस कॉमेडी में तथ्य रखे गये हैं, सटीक सवाल उठाए गये हैं, राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर की जा रही राजनीति और नेताओं पर करारा व्यंग्य किया गया है। राजस्थानी भाषा की महत्ता, इतिहास,संस्कार, संस्कृति और जीवन मूल्यों की सीख देने वाले सभी पहलुओं को उकेरा गया है। भाषा की मान्यता को लेकर राजनेताओं की ओर से अब तक किए गए वादों और राजनीति के घटियापन से पर्दा उठाया गया है। इस वीडियो को ‘मुकेश की कॉमेडी’ यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है।
राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर इस कॉमेडी में राजनीति और सरकारों से बड़े सवाल किए गए है। जब ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ के प्रावधान में हर बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने की नीति बनी है, तो फिर राजस्थानी भाषा को मान्यता क्यों नहीं दी जा रही है? राजस्थानी भाषा की मान्यता की मांग को लेकर जो जनांदोलन का इतिहास है, उसे कोई लोकतांत्रिक सरकार अनदेखा कैसे कर सकती है? मुकेश की कॉमेडी के इस वीडियो का यही संदेश है।
सवाल उठता है कि क्या राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा के शासन सचिव राजस्थानी को 8वीं अनुसूची में शामिल करने और राजभाषा का दर्जा देने के मुद्दे पर सक्रिय है? विधानसभा ने 3 सितंबर 2003 को ही राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था। जिसके संबंध में एसके महापात्र की अध्यक्षता वाली समिति गठित की गई। इस समिति की सिफारिश गृह मंत्रालय में विचाराधीन है। विडंबना देखिए कि राजस्थानी भाषा की मान्यता की मांग को लेकर 2 पीढ़ियों से आंदोलन चल रहा है। विधानसभा ने एक दशक पहले संकल्प भी पारित कर दिया। मान्यता के लिए गठित समिति ने सिफारिश भी दे दी। और तो और सरकार ने राजस्थानी को बढ़ावा देने के लिए वर्षों से राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति अकादमियां खोल रखी है। इन सबके बावजूद, राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिली है। अब मुकेश की कॉमेडी ने फिर सबका ध्यान इस मुद्दे पर आकृष्ट किया है। केंद्र के नेता जी अब तो जाग जाइये।