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मेरी बात : गोपाल जी, गुलाब जी बीकानेर को ये सीख दे गये

“गोपाल जी ! बीकानेर में पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने पत्रकारों के अधिकारों की बात कही है। पहली बार किसी नेता ने पत्रकारिता की दुश्वारियों की बात की है। पहली बार किसी नेता ने पत्रकारों की परेशानियों को समझा है। ..वर्ना मैंने तो बीकानेर में ‘राज’नेताओं को पत्रकारों से उलझते हुए ही देखा है। बड़ों-बड़ों को छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुलाते देखा है। और तो और तिस पर मेरे शहर की चुप्पियों को महसूस किया है। गोपाल जी ! पत्रकारों के बीच आकर पत्रकारिता के अधिकारों की बात करने से राजनीति में अच्छा संदेश जाएगा। गुलाब जी ! आप हमारे बीच आये तो पत्रकार खुलकर बोले हैं।”

कल बीकानेर प्रेस क्लब द्वारा आप दोनों के अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान कई बार मन किया कि आपसे ये बात साझा करूं लेकिन यह सोचकर हर बार रुक गया कि “कहे से ज़्यादा लिखे का महत्व होता है।” इसलिये ‘मेरी बात’ के जरिये मेरे ‘मन की यह बात’ आप तलक पहुंचा रहा हूं। वहां कहता तो 40 पत्रकार सुनते.. यहां कह रहा हूं तो हज़ारों तक संदेश पहुंचेगा।

रविवार को ‘रामरतन कोचर स्मृति पुरस्कार सम्मान समारोह’ का आयोजन था। इस बार यह सम्मान राजस्थान के लोकप्रिय पत्रकार गुलाब बत्रा को पत्रकारिता में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिये दिया गया। समारोह के मुख्य वक्ता जयपुर महानगर टाइम्स के संस्थापक (वर्तमान में विधायक, सिविल लाइंस) गोपाल शर्मा थे। गुलाब बत्रा और गोपाल जोशी ये दोनों ही पत्रकार राजस्थान में पत्रकारिता के मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिये कार्यरत ‘जेएफजे’ से जुड़े हुए हैं। ऐसे में ‘जर्नलिस्ट फॉर जर्नलिज्म’ परिवार के लिये यह विशेष तौर पर ख़ुशी की बात थी। ये ख़ुशी तब और दुगुनी हो गई, जब ये दोनों पत्रकार बीकानेर प्रेस क्लब के अभिनंदन कार्यक्रम में पत्रकारों से रू-ब-रू हुए। इस मुलाक़ात में कई सकारात्मक बातें हुईं। पत्रकारों ने पत्रकार और वर्तमान में जयपुर के सिविल लाइन्स से विधायक गोपाल शर्मा के सामने उनकी कुछ मांगें भी रखीं।

वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए पत्रकारिता के मूल्यों पर बात की। वे ये समझाने में कामयाब रहे कि पत्रकारिता में मुखर होकर बोलने, निडरता से मुद्दे रखने कितने ज़रुरी हैं। उन्होंने जार से लेकर जेएफजे के गठन पर बात की। साथ ही, पत्रकारों के साथ अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभव भी साझा किये।

वहीं, विधायक गोपाल शर्मा ने पत्रकारों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया। चूंकि गोपाल शर्मा ख़ुद पत्रकार हैं, ऐसे में वे पत्रकारिता की चुनौतियों को बेहतर महसूस कर सकते हैं। इसी वजह से गोपाल शर्मा की बातें पत्रकारों को ज्यादा प्रभावी लगीं। संभवतया, बीकानेर में पहली बार किसी नेता ने पत्रकारों से पत्रकार बनकर उनके मन की बात जानने की कोशिश की होगी। संभवतया, पहली बार किसी नेता ने पत्रकारिता के सामने आने वाली दुश्वारियों पर बात की होगी। एक पत्रकार के नज़रिये से देखें तो मुझे ये सुकून देने वाली बात लगी।

एक संजीदा राजनेता और एक संजीदा पत्रकार का संबोधन सुनकर अनायास ही सवाल कौंधे कि क्या अन्य नेता या पत्रकार भी ऐसा नहीं कर सकते? क्या पॉलीटिक्स-मीडिया के पूरक होने की बात करने वाले राजनेता ऐसा नहीं कर सकते? वे क्यों भूल जाते हैं कि मीडिया भी लोकतंत्र के लिये उतनी ही जरुरी है, जितनी सियासत। आख़िर क्यों वे गोपाल शर्मा जैसे विधायकों से सीख नहीं लेते? ..और मीडिया को भी यह याद रखना चाहिये कि उसका काम चुप्पी साधना नहीं, बल्कि मुखर होकर मुद्दे उठाना है। इन बातों पर संजीदगी से विचार किया जाना चाहिये।

मुझे लगता है कि विधायक गोपाल जी, पत्रकार गुलाब जी की यह बीकानेर यात्रा.. बीकानेर को ऐसी सीख देने में कामयाब हुई है।

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