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विमर्श : कलेक्टर मैडम ! रानी बाज़ार अंडरब्रिज डिजायन की भी जांच करवा लो

राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा बीकानेर आ रहे हैं। उनको अपने काफिले के साथ रानी बाज़ार अंडरब्रिज के नीचे से निकलना चाहिए। इसलिये ताकि वे जान सके कि यह अंडरब्रिज कितना सही या ग़लत बना है? बीकानेर कलेक्टर की संवेदनशीलता देशनोक हादसे के दौरान सामने आई। अब वे देशनोक ओवरब्रिज की डिजायन की जांच करवाएंगी। कलेक्टर मैडम ! लगे हाथ रानी बाज़ार अंडरब्रिज की डिजायन की भी जांच करवा लीजिये। इसकी तकनीकी खामियों में भी सुधार कर लें, तभी संभावित दुर्घटना से बचा जा सकता है। बीकानेर में सड़क सुरक्षा समिति तब जगी है, जब देशनोक ओवरब्रिज पर दर्दनाक हादसा हुआ। देशनोक में हुए हादसे में नोखा के 6 भाइयों (सभी अपने-अपने परिवार के मुखिया) की मौत हो गई। इस हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया है।

जिला कलक्टर ने ओवरब्रिज डिजायन जांच करवाने का फैसला लिया है। सवाल यह है कि डिजायन बनाते समय क्यों नहीं जांच की गई? लाखों रुपये तनख्वाह लेने वाले इंजीनियर, समीक्षा और निगरानी करने वाले अफसर कहां गए थे। इंजीनियरों की फौज आख़िर क्या करती रही? यह बात पहली नज़र में सही है कि देशनोक ओवरब्रिज बनाते समय सुपर एलिवेशन ठीक से नहीं बनाया गया है। कलक्टर मैडम ! यही हालत बीकानेर शहर में रानी बाजार के अण्डर ब्रिज की है। अंडरब्रिज का सुपर एलिवेशन, यहां तक की वास्तविक नक्शा ताक पर रखकर अंडरब्रिज बनाया गया है। आप जांच करवाएंगे तो सारा सच सामने आ जाएगा। यह अण्डरब्रिज भी किसी हादसे की वजह बने, उससे पहले तकनीक खामियां दूर कर ली जाएं तब तो सड़क सुरक्षा समिति के होने का कोई अर्थ है, अन्यथा सब बेकार है। जस्सूसर से फड़ बाज़ार की तरफ आने वाले पुल के रास्ते में ब्लाइंड मोड़ है। किसी तरह का संकेतक या सुरक्षा उपाय नहीं है। यहां पहले भी कई दुर्घटनाएं हुई हैं। बीकानेर शहर और जिले में सड़कों पर चलते समय विजिलेंस नहीं होने की स्थिति में सुरक्षा और संकेत दोनों का काफी जगह अभाव है। मोड़, खस्ताहाल सड़कें, बनावट में तकनीकी खामियां दुर्घटना की वजह बनती है। कायदे से सड़क सुरक्षा समिति की माह में एक बार और हिट एंड रन कमेटी की पाक्षिक बैठक होनी होती है। लेकिन जिला कलक्टर साहिबा ने अभी तक हिट एंड रन कमेटी की एक भी बैठक नहीं की है। आख़िर हिट एंड रन कमेटी की मीटिंग क्यों नहीं हो रही है, जबकि जिला कलक्टर तो जन समस्याओं के प्रति अतिसंवेदनशील है!

दुर्घटना सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में अब तक जितने सुझाव आएं हैं, उनका विश्लेषण करें तो पाएंगे कि बैठक मात्र औपचिरकता ही है। सवाल यह है कि सड़कें, ओवरब्रिज, अण्डरब्रिज बनाते समय हमारे इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ कहां चले जाते हैं? बनाने के तय मानक, निगरानी क्यों ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी जाती हैं?

बीकानेर ज़िले में कितने ब्लाइंड मोड हैं, जिनमें संकेतक नहीं लगे हैं। जहां सड़कें तकनीकी रूप से सही नहीं है। सड़क, पुल निर्माण में तकनीकी खामियां रह जाती हैं, वे नये-नये एक्सीडेंट जोन बन जाते हैं। जिन पर सड़क सुरक्षा समिति कितना ध्यान देती है? सर्विस लेन और राइट ऑफ-वे के क्या हाल हैं? इन पर हुए अतिक्रमण दुर्घटना के कारण बन सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ने वाली सड़कों पर गतिरोधक लगाने, रंबल स्ट्रिप लगाने और सड़क, डिवाइडर के मरम्मत का काम जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। ये सारे काम सीएम के बीकानेर दौरे से पहले करवा लिये जाए, नहीं तो ये सीएम के ध्यान में आएंगे ही। नहीं तो फिर कलक्टर की संवेदनशीलता पर सवाल उठेगा ही।

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