विमर्श : सीएम साहब ! सरकार की तस्वीर का ‘दूसरा पहलू’ भी तो देखिये

मुख्यमंत्री जी ! बीकानेर में आपका स्वागत है। आपके कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे हुए, बधाई। बेशक आप सरकार में रहकर अच्छा काम करना चाहते हैं। आप पूरी ऊर्जा के साथ ऐसा करने की कोशिशों में लगे हुए दिखाई भी दे रहे हैं। बड़ी बात है कि आपकी सरकार ने 73% बजट घोषणाएं पूरी कर दी हैं या प्रगति पर हैं। आप अपनी सरकार की 2 वर्ष की उपलब्धियों को.. आप पिछली सरकार की 5 साल की उपलब्धियों से बेहतर बता रहे हैं। आपकी सरकार को ‘बेस्ट परफार्मिंग स्टेट अवार्ड’ से नवाजा गया है। इस सरकार ने 392 संकल्पों में से 274 पूरे कर दिए हैं। किये गये वादों के 70% काम पूरे किये जा चुके हैं और अब इन उपलब्धियों के प्रचार के लिए पूरे प्रदेश में विकास रथ छोड़ दिए गए हैं। मुख्यमंत्री जी ! आपसे आग्रह है कि इन विकास रथों के माध्यम से आप सरकार की प्रगतिशील तस्वीर के ‘दूसरे पहलुओं’ को भी देखना-जानना चाहिये। मसलन-

-आपको जानना चाहिये कि जनता प्रशासन की निष्क्रियता और अनदेखी से दु:खी तो नहीं है?
आपको जानना चाहिये कि प्रशासन कहीं जनता को अनसुना तो नहीं कर रहा?
आपको पता लगाना चाहिये कि सरकार की ‘संवेदनशीलता’ पर जनता क्या कह रही है।
-आपको किसी से पूछना चाहिये कि भाजपा के नेताओं का जनता के लिये कैसा रवैया है?
-आपको पता लगाना चाहिये कि आपकी सरकार में पार्टी विधायकों का पूरा सम्मान तो है न?
-आपको यह भी पता लगाना चाहिये कि आपका प्रशासन जनता के चुने प्रतिनिधियों को मान तो दे रहे हैं। कहीं उनका सार्वजनिक अपमान तो नहीं हो रहा?

सीएम साहब ! ये बातें आपको इसलिये बताई जा रही हैं ताकि आप इस तरफ भी ध्यान दें। यहां हमारा मंतव्य सरकार की आलोचना करना कतई नहीं है। अगर 3 विधायकों की बात छोड़ भी दें तो प्रदेश में प्रशासन के क्या हाल है, इसे गंभीरता से समझने की ज़रुरत है, फिर सुधारने की जरुरत है।

बात बीकानेर की करें तो यहां बीजेपी सरकार की थू-थू हो रही है। एक और बात, यह कड़वी और सच बात आपको.. आपकी पार्टी-प्रशासन के लोग कतई नहीं बताएंगे। लेकिन.. आपको इन बातों का सच जानना चाहिये। एक सच तो यह भी है कि बीडीए द्वारा गोचर भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव से जो जनाक्रोश उमड़ा है, उससे शासन-प्रशासन और सरकार जनता की नजरों में बैकफुट पर है। ये कहने में गुरेज नहीं कि ये जनविरोध.. सरकार और बीजेपी पार्टी दोनों के लिये महंगा साबित हो सकता है। इसी तरह, बीकानेर विधायक जेठानंद व्यास के साथ पार्टी के मंत्री, नेता और प्रशासन जो व्यवहार कर रहा है, उसके बाद आपकी सरकार को विकास रथ से उपलब्धियों का प्रचार करने की कतई ज़रुरत नहीं रहती। जनता के दिलों में भारतीय जनता पार्टी की एक अलग ही छवि इजाद हो रही है। आप चाहें तो अपने विश्ववसनीय लोगों की इन बातों की सचाई पता कर लें। यहां आलम यह हो गया है कि भाजपा सरकार की आलोचना के लिए विरोधी दल कांग्रेस को कोई प्रयास करने की ज़रुरत ही नहीं है। सरकार, पार्टी में विरोधी और प्रशासन तीनों मिलकर बीजेपी और राजस्थान सरकार की जड़ें खोदने का काम कर रही है।

एक और मसला, जो ताज़ा-तरीन है। आपकी सरकार के 2 साल पूरे होने पर प्रभारी मंत्री और चिकित्सा मंत्री की संयुक्त प्रेस वार्ता रखी गई। इस दौरान बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास खुलकर नाराज़ क्यों हुए ? शहर के विकास कार्यों को लेकर पत्रकारों के सवालों पर पीछे खड़े विधायक का गुस्सा क्यों फूट पड़ा ? उन्होंने मंच से ही अपनी आपत्ति दर्ज क्यों कराई ? विधायक व्यास ने दो टूक कहा “विधायक बराबर घूमता है। आप मेरे साथ चलिए, कितने काम चल रहे हैं, खुद देखिये। मैं हर वार्ड में घूम रहा हूं, फिर भी आप कह रहे हैं कि विधायक काम नहीं कर रहा।” वे पत्रकारों से बोले कि “आप पत्रकार हैं, इसका मतलब यह नहीं कि जो मन में आए, वो बोल देंगे।”

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक को बैठने के लिये कुर्सी नहीं मिली, क्या ये शर्म की बात नहीं है? आपकी सरकार के अधिकारी बैठे रहे और विधायक खड़ा रहे, क्या यह सरकार की बेइज्जती नहीं है?… या फिर जिस नेता ने कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ. बी.डी. कल्ला को हराया, उनकी ऐसी बेकद्री जनता को खलती नहीं है ? एक सवाल यह भी कि आखिर विधायक व्यास के साथ ही ऐसा व्यवहार बार-बार क्यों होता है? आज भी विधायक के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले विकास रथ रवाना कर दिए गए। क्यों ? क्या आपकी सरकार में आप ही की पार्टी के विधायक की इतनी ही कद्र है?  विकास रथ सरकार की दो साल की उपलब्धियों को सामने रखने के बजाय यह घटनाक्रम.. मीडिया की सुर्खियां बन गया। सीएम साहब ! ऐसे हालात कमोबेश सब जगह हैं। आपकी सरकार के काम-काज और ‘उपलब्धियों’ की दूसरी तस्वीर यह भी है। इसे चश्मा साफ करके ज़रूर देखा जाना चाहिये।

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6 thoughts on “विमर्श : सीएम साहब ! सरकार की तस्वीर का ‘दूसरा पहलू’ भी तो देखिये

  1. आप ने बिलकुल सच लिखा है जो हकीकत है वहीं बयां किया है । जिला धीश और मीणा जी तो विधायक जेठान्द जी को आम नागरिक से भी ज्यादा गन्दा व्यवहार कर रहे हैं। कही बीच में ही उपचुनाव नहीं कराने पड़ जाये। सीट कांग्रेस के पास नहीं चली जाय। अन्दर की खबर लेवें।

  2. मैं हेम शर्मा जी के वक्तव्य से पूर्णतः सहमत हूँ ।आपने सरकार के मुख्या को हकीकत में वर्तमान हालातों से अवगत करवाने की जो कोशिश की है…सराहनीय एवं सार्थक है ।

  3. राज्य की पहली सरकार जिसका अधिकारी कहना नही मान रहे।शहरी सेवा शिविर मे सफाई शिकायतो व मुख्य रोड पर अवैध रोड़ कट बंद करने की शिकायतो का CM के आदेश के बाद भी ,कलेक्टर,बीडीए,मन्त्री सुमित गोदारा ,SP तक
    को लिखित शिकायतो मय फोटो देने के बाद भी निराकरण नही हुआ।

  4. राज्य की पहली सरकार जिसका अधिकारी कहना नही मान रहे।शहरी सेवा शिविर मे सफाई शिकायतो व मुख्य रोड high way पर पर अवैध रोड़ कट बंद करने की शिकायतो का CM के आदेश के बाद भी ,कलेक्टर,बीडीए,मन्त्री सुमित गोदारा ,SP तक
    को लिखित शिकायतो मय फोटो देने के बाद भी निराकरण नही हुआ।

  5. हेम शर्मा जी ने सही बात लिखी हैं

  6. मैं हेम शर्मा जी की बात से सहमत हूं उन्होंने जो बात कही है अक्षरत: सही है क्योंकि जिला के अधिकारीगण न तो विधायकों की बात सुनते हैं, न उनके कार्यों को करते हैं । न ही समस्याओं का समाधान करते हैं। जनता दुखी और त्रस्त है उनके कार्य नहीं होते और ऐसी परिस्थितियों में भाजपा के विधायकों की तो यह हालत है, की एक आम नागरिक की तरह उनके साथ व्यवहार किया जाता है । सीएम साहब को इस परिपेक्षय में संज्ञान लेना चाहिए । बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं 392 संकल्पों में से 70% काम हो गया। धरातल पर वस्तु स्थिति कुछ और ही है। मैं बीजेपी समर्थक हूं और आरएसएस का सैनिक भी हूं परंतु दुख: की बात है की राजस्थान सरकार में जिस ढंग से काम होने चाहिए थे वह नहीं हो रहे हैं। सरकारी तंत्र के इन नुमाइंदो की जांच हो सीएम साहब संज्ञान ले और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। शहर की टूटी सडके, टूटी नालियां और कचरा, चारों तरफ गवाही दे रहे हैं कि शहर का विकास कैसा हो रहा है? मैं जनता जनार्दन के दुखों का वर्णन करने में सहमत नहीं हूँ।

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