विमर्श : गोचर आंदोलन में जो काम दिग्गज नेता न कर पाए, वो संतों और जनता ने कर दिखाया

-हेम शर्मा
लो जी ! गोचर को लेकर अब तक की सबसे बड़ी ख़बर आ चुकी है। ख़बर यह है कि गोचर भूमि के अधिग्रहण के प्रस्ताव को लेकर चल रहा आंदोलन एकबारगी स्थगित हो गया है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई ने आज विधायकों, जनप्रतिनिधियों और संत समाज केसाथ गोचर के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि “बीडीए के मास्टर प्लान से बीकानेर का संत समाज नाराज था। सीएम भजनलाल शर्मा ने इस पर संज्ञान लेते हुए 5 हजार 800 हैक्टेयर गोचर को बीडीए और कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से अलग करते हुए स्पेशल एरिया कर दिया है।”

ये गोचर प्रेमियों, गो संरक्षकों और संत समाज की एक बड़ी जीत है। क़रीब 4 महीनों से चल रहे गोचर आंदोलन की सुखद परिणीति आई। इससे पहले गोचर आंदोलन को लेकर कई दिग्गजों ने कई वायदे किये, लेकिन उनके वादे कभी दावों में तब्दील नहीं हो सके। सारी कोशिशें सिफर ही साबित हुईं।
–सबसे पहले बीकानेर से बीजेपी विधायकों ने ही मुख्यमंत्री को लिखित में दिया था कि “गोचर यथावत रहनी चाहिये।” लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ।
-फिर आए जोधपुर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत। जिन्होंने बीकानेर गोचर के साथ अपना ताल्लुक़ात बताते हुए कहा था कि “गोचर भूमि कायम रहनी चाहिए।” लेकिन शासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
-फिर बारी आई- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की। उन्होंने भी इस मामले की वकालत की और देवीसिंह भाटी से कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले में बात करेंगी। लेकिन कोई नतीजा न आया।
-अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़ ने भी जनता के साथ आवाज बुलंद की। भाजपा नेता देवीसिंह भाटी ने भी जमकर समर्थन किया। लेकिन किसी की बात पर कोई एक्शन न हुआ।
-आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी बीकानेर में कहा कि “गोचर मुद्दे पर वे संघर्ष में जनता के साथ है।” लेकिन उन्हें भी सरकार का साथ न मिला।
-अबकी बार केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम ने चुप्पी तोड़ी। जोर देकर बोले कि- “पता करेंगे कि जहां पहले विकास प्राधिकरण बने हैं, वहां क्या हुआ? फिर मुख्यमंत्री से बात करेंगे।” ..लेकिन इसके बाद मुख्यमंत्री से बात की कोई खबर नहीं आई।
-कांग्रेस नेता डॉ. बी. डी. कल्ला समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं ने भी गोचर आन्दोलन का समर्थन किया। लेकिन नतीजा वही, ढाक के तीन पात।
-बताया यह जाता है कि संघ के कुछ पदाधिकारियों ने भी गोचर मुद्दे पर समर्थन जताया था। लेकिन वहां भी खोदा पहाड़ और निकली चुहिया। किसी पर कोई असर नहीं।
इन सबके बावजूद बीकानेर की जनता और साधु-संतों इस मुद्दे पर कभी चुप नहीं बैठे। आंदोलन से जुड़े लोगों ने गली-गली, मोहल्ला-मोहल्ला जाकर जनसंपर्क किया। धीरे-धीरे यह मुद्दा जन-जन की जुबान पर आ गया।
अब सियासी समीकरण देखिये। एक तरफ केन्द्र-राज्य की भाजपा सरकार थी तो दूसरी तरफ साधु-संत। राजस्थान के मुख्यमंत्री सीधे तौर पर कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं थे। जिससे सरकार के प्रति भी जनाक्रोश और संतों की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। वहीं, भाजपा के अन्य नेता भी पहले दिये बयान को झुठलाकर जन भावना से बाहर नहीं जा सकते। इस आंदोलन ने सरकार के सामने ऐसी स्थिति ला दी कि न तो उगला जाए और न ही निगला जाए। सरकार ऐसे पशोपेस में थी। हालत यह कि जैसे-तैसे इस मुद्दे का हल निकाला जाए।… और आज.. सरकार की यह बात भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये सामने आ गई।
बात यह कि “सीएम भजनलाल शर्मा ने इस पर संज्ञान लेते हुए 5 हजार 800 हैक्टेयर गोचर को बीडीए और कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से अलग करते हुए स्पेशल एरिया कर दिया है।“
अब आप ही बताइयचे कि क्या यह कहना ग़लत होगा कि गोचर आंदोलन में जो काम दिग्गज नेता न कर पाए, वो संतों और जनता ने कर दिखाया।
