विमर्श : अपने सबसे बुरे हालत में है ‘स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय’

–हेम शर्मा
कभी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सैध्दान्तिक घोषणा से केन्द्रीय कृषि वि.वि. के रूप में स्थापित होने की आस संजोये स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय आज बहुत बुरे हालात से गुजर रहा है। केन्द्रीय बजट में राजस्थान में एक केन्द्रीय कृषि वि.वि. राजस्थान को देने की घोषणा की थी। यहां की राजनीतिक शून्यता इसे धरातल पर नहीं ला सकी। इसके बावजूद नए कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने पदभार ग्रहण करने के दौरान कहा है कि “विश्वविद्यालय को अग्रिम पंक्ति में लाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।” सवाल उठता है- कैसे ? अफसोस ! उन्होंने इसका तरीका नहीं बताया। वे इस वि.वि. के 27 वें कुलगुरु हैं। वे नए आए हैं, उन्हें नहीं पता कि वि.वि. में डीन-डायरेक्टर के 13 पद हैं, सभी खाली पड़े हैं। अभी सभी पद कार्यवाहक व्यवस्था से चलाए जा रहे हैं। कोई अनुसंधान का काम रिक्त पदों के चलते नहीं हो रहा है। शिक्षण, प्रसार, इंस्टीट्यूट आफ एग्रीबिजनेस मैनेटमेंट, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय और सम्बध्द चार कृषि कालेजों में कितना टीचिंग स्टाफ है। प्रो. दुबे साहब ! पहले पता लगा लीजिए । फिर वि.वि. को अग्रिम पंक्ति में लाने का वक्तव्य देना ठीक रहेगा।
आज हालात यह है कि वि.वि. में नॉन-टीचिंग के कुल स्वीकृत 464 पदों में से, आधे से ज्यादा (248 पद) खाली पड़े हैं। डीन-डायरेक्टर, क्षेत्रीय निदेशक समेत टीचिंग के 285 स्वीकृत पदों में से 202 पद खाली पड़े हैं। अब आप ही बताए कि आप कौनसे डीन-डायरेक्टर को काम सौंपेंगे? कौनसे क्षेत्रीय निदेशक, अतिरिक्त निदेशक को निर्देश जारी करेंगे? आपके साथ विचार-विमर्श और योजनाएं बनाने के लिए कौन बैठेगा? पहले आप जान तो लें कि वि.वि. की स्थिति क्या है। बीकानेर के जनप्रतिनिधियों को तो समय ही नहीं है कि वे वि.वि. की तरफ झांककर भी देखें। सब नेता ‘विकास’ में लगे हुए हैं। क्या केन्द्रीय मंत्री, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और क्या ही विधायक। सबकी प्राथमिकताएं तो दूसरी हैं। फिर आप किसके बूते इस वि.वि. को अंतिम पंक्ति से अग्रिम पंक्ति में ले आएंगे? आपकी रणनीति बताएं, ताकि जनता को आपकी कही बात लफ्फाजी न लगे।
आपके वि.वि. में डीन-डायरेक्टर के सभी 13 पद रिक्त है। क्षेत्रीय निदेशक के स्वीकृत दो पद खाली है। अतिरिक्त निदेशक का स्वीकृत के एक पद वो भी खाली। उप निदेशक के दो स्वीकृत पद खाली। सहायक निदेशक शारीरिक के दो स्वीकृत पद खाली, सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष के स्वीकृत 6 पदों में से 5 खाली है। अनुसंधान संपादक का एक पद स्वीकृत वो भी रिक्त है। विषय वस्तु विशेषज्ञ के 40 स्वीकृत पदों में से 26 रिक्त है। सहायक आचार्य के स्वीकृत 139 में से 90 पद रिक्त है। सह आचार्य के 50 में से 37 पद खाली है और आचार्य के 14 पदों में से 12 खाली है। वि.वि. की ओर से राज्य सरकार को पदों की स्थिति को लेकर भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि टीचिंग स्टाफ के कुल स्वीकृत 285 में से 83 पद ही भरे हुए हैं। 202 पद खाली है। अब आप खुद तय कर लें जब पर्याप्त मानव संसाधन ही नहीं है तो अंतिम पंक्ति में ही रहोगे ना। अग्रिम पंक्ति में कैसे आ पाओगे ?
माननीय कुलगुरु डॉ दुबे साहब ! आपकी मंशा बहुत पवित्र होगी। लेकिन इन सबके बिना आपकी पवित्र मंशा कैसे पूरी होगी? राजस्व सृजन की दिशा में भी रणनीतिक रूप से काम किया जाएगा। न नौ मण तेल होगा, न राधा नाचेगी। बातों से काम होता तो वि.वि. पिछड़कर अंतिम पंक्ति में नहीं जाता। फिर भी अगर आपमें साम्मर्थ्य है, विजन है, जज्बा है तो अंतिम पंक्ति में खड़े वि.वि. को वाकई अग्रिम पंक्ति में खड़ा करके दिखाइये। फिलहाल हकीकत तो यह है कि यह विश्वविद्यालय अपने सबसे खराब हालात में है। मान लीजिये..

Thought -provoking post !
No doubt, SK Rajasthan Agricultural University, Bikaner needs to develop a short-term Vision and Strategy for concerted action and achievements!
Need-based and timely Commentary !
Thanks for sharing